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Kashi Ki Aawaz | भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा काली मंदिर सौंदर्यीकरण, घटिया रेलिंग निर्माण जनता में आक्रोश।
सोनभद्र

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा काली मंदिर सौंदर्यीकरण, घटिया रेलिंग निर्माण जनता में आक्रोश।

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहा काली मंदिर सौंदर्यीकरण, घटिया रेलिंग निर्माण जनता में आक्रोश।

ब्यूरो रिपोर्ट तारा शुक्ला सोनभद्र

​चोपन (सोनभद्र): नगर पंचायत चोपन द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर के प्रसिद्ध काली मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए लगाई जा रही रेलिंग में अत्यंत घटिया सामग्री के प्रयोग का मामला प्रकाश में आया है। स्थानीय नागरिकों ने इस कार्य में व्यापक भ्रष्टाचार और मानकों की अनदेखी का आरोप लगाया है। ​मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि रेलिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा लोहा और पाइप बेहद पतला है सुरछा और सुंदरता  को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। काली मंदिर एक ऊँचाई वाले स्थान पर स्थित है, जहाँ हजारों श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। घटिया सामग्री से बनी यह रेलिंग भीड़ का भार सहने में सक्षम नहीं दिख रही है, जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। स्थानीय सभासदों और जागरूक नागरिकों ने इस 'खानापूर्ति' वाले कार्य को तत्काल रोकने की मांग की है। लोगों का आरोप है कि नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार की मिलीभगत से जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किया जा रहा है। ​निर्माण कार्य शुरू होने के बाद से ही इसकी गुणवत्ता को लेकर चर्चाएं गर्म हैं, लेकिन नगर पंचायत प्रशासन की ओर से अभी तक कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं आया है इतना ही नही मंदिर के बगल में  पार्क का भी वही हाल है जो लगभग 10 लाख की लागत से पुनः सुंदरीकरण का कार्य संशय और संदेह के घेर में है। "नगर पंचायत चोपन द्वारा केवल दिखावे के लिए काम किया जा रहा है। रेलिंग इतनी कमजोर है कि हाथ लगाने पर हिल रही है। मानक विहीन कार्य के गुणवत्ता को देखते हुए वहां के रहवासी जिलाधिकारी महोदय से मांग करते हैं कि इस कार्य की तकनीकी जांच  कराई जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। यदि ऐसा नहीं होता है तो आने वाले समय में यदि कोई अप्रिय घटना घटती है तो इसकी सारी जिम्मेदारी शासन सत्ता और वर्तमान सरकार को जाएगी। आस्था और समाज से जुड़े लोगों का कहना है कि समय रहते यदि इस पर संबंधित अधिकारी त्वरित कार्यवाही नहीं करते हैं तो आगे जो भी होगा उसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग के संबंधित अधिकारी एवं जिलाधिकारी की होगी।

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