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Kashi Ki Aawaz | मुगलसराय में स्वकर वसूली पर जनहित मांगपत्र।
चंदौली

मुगलसराय में स्वकर वसूली पर जनहित मांगपत्र।

मुगलसराय में स्वकर वसूली पर जनहित मांगपत्र 2015 से टैक्स वसूली पर सवाल, न्याय न मिलने पर हाईकोर्ट जाएंगे नागरिक।

ब्यूरो अशोक कुमार जायसवाल

मुगलसराय । नगर पालिका परिषद पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर में स्वकर (हाउस टैक्स) वसूली को लेकर एक बड़ा जनहित मामला सामने आया है। नगर के भवन स्वामियों और नागरिकों ने प्रभारी अधिशासी अधिकारी एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र देकर मांग की है कि स्वकर की वसूली वर्ष 2015 से न लेकर, भवनों के वास्तविक सर्वे की तिथि और उसी वित्तीय वर्ष से ही लागू की जाए।
प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि स्वकर प्रणाली 1 अप्रैल 2015 से लागू तो कर दी गई, लेकिन विभागीय लापरवाही के चलते वर्ष 2025-26 तक भी नगर के सभी पुराने और नए भवनों का सर्वे और कर निर्धारण पूरा नहीं हो सका। इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ा है, जिन्हें अब एकमुश्त भारी एरियर (बकाया) के रूप में लाखों रुपये तक का भुगतान करना पड़ रहा है। नागरिकों का आरोप है कि कर विभाग की उदासीनता के कारण नामांतरण और आपत्तियों से जुड़ी फाइलें 5-6 वर्षों से लंबित हैं। कई फाइलें कार्यालयों में धूल खा रही हैं, जिससे लोगों को बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। साथ ही, नामांतरण प्रक्रिया में वार्ड सभासद की अनिवार्य सहमति की शर्त ने समस्या को और जटिल बना दिया है। राजनीतिक कारणों या आपसी मतभेद के चलते कई बार सभासद अभिमत देने में देरी करते हैं, जिससे फाइलें अटक जाती हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी जैसे सरकारी दस्तावेज मान्य हैं, तो केवल सभासद की सहमति के अभाव में फाइलों को लंबित रखना अनुचित है। इससे न केवल जनता परेशान हो रही है, बल्कि नगर पालिका के राजस्व पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। पूर्व छात्र संघ महामंत्री राकेश रोशन बागी ने कहा कि वर्ष 2015 से अब तक स्वकर की वसूली न होने के बावजूद अब एक साथ 10-11 वर्षों का टैक्स वसूला जाना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने मांग की कि स्वकर की वसूली वर्ष 2026 से लागू की जाए और पुराने एरियर को समाप्त किया जाए, जिससे प्रत्येक भवन स्वामी को लाखों रुपये के आर्थिक बोझ से राहत मिल सके। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता विकास शर्मा ने भी इस मुद्दे को मानवाधिकार से जुड़ा बताते हुए कहा कि विभागीय लापरवाही का खामियाजा जनता को नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि 2015 से एकमुश्त स्वकर वसूला गया तो यह लाखों रुपये का बोझ बन जाएगा, जिससे आम नागरिकों की स्थिति और कठिन हो जाएगी। इस संबंध में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी राजीव मोहन सक्सेना (पी.सी.एस.) ने बताया कि वर्ष 2015 से स्वकर लागू होने और 2020 की बोर्ड बैठक में लिए गए निर्णयों की जांच की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जो भी नियमों के अनुरूप होगा, उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। इस जनहित मुद्दे को पत्रक दाताओ ने कहा अगर समय रहते न्यायपूर्ण ठोस निर्णय नहीं लिया गया उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।

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