“निशाने पर जुनून – शताक्षी सेठ की कहानी”
वाराणसी की पावन धरती ने कई रत्न दिए हैं, और उन्हीं में एक नाम है – शताक्षी सेठ एक ऐसा नाम जिसने शूटिंग के क्षेत्र में अपने शहर और देश को गौरवान्वित किया है।
बचपन से ही हथियारों के प्रति गहरी रुचि रही। जब दूसरे बच्चे खिलौनों से खेलते थे, तब शताक्षी घर में अपने पापा और दादा के हथियारों को देखकर प्रभावित होते थे। उसी लगाव ने उन्हें पहली CO2 एयरगन थमाई और यहीं से एक खिलाड़ी का जन्म हुआ। धीरे-धीरे यह शौक जुनून में बदला और फिर एक मिशन बन गया।
शूटिंग के क्षेत्र में शताक्षी की उपलब्धियाँ काबिल-ए-तारीफ हैं।
उन्होंने स्टेट लेवल की रायफल ग्रुप शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता है और प्रोन राइफल शूटिंग में भी अपना दमखम दिखाया है। साथ ही उन्होंने नेशनल लेवल पर भी हिस्सा लिया है, जो किसी भी युवा शूटर के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
हाल ही में भोपाल के, एम पी शूटिंग रेंज पर आयोजित 0755 वीं इंडिया ओपन स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने पॉइंट .22 फायर आर्म्स शूटिंग में अपनी टीम के साथ गोल्ड मेडल जीता। इसके अलावा 10 मीटर राइफल 68 वी नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में नेशनल क्वालिफाई 26 दिसंबर 2025 अपने नाम किया वो भी 6 महा की कड़ी मेहनत और कोच श्री सत्यम सिंह की मार्ग दर्शन में पूर्वांचल शूटिंग एकेडमी और स्कूल का नाम रोशन किया।
उनकी मेहनत और प्रदर्शन ने वाराणसी के निशानेबाजी समुदाय में एक नया जोश भर दिया है। पूर्वांचल शूटिंग एकेडमी से जुड़ी, शताक्षी इस फील्ड में आने वाले युवतियों के लिए एक आदर्श बन चुकी हैं।
अपनी पूरी ऊर्जा शूटिंग को समर्पित कर दी — और नतीजा आज सबके सामने है।
शताक्षी सेठ कहती हैं:
“खेल मेरे लिए सिर्फ प्रतिस्पर्धा नहीं, साधना है। हथियारों से मेरा रिश्ता बचपन से रहा है, लेकिन अब वो मेरा माध्यम हैं अपने देश को गौरवान्वित करने का।”
आज शताक्षी सेठ न सिर्फ एक शानदार शूटर हैं, बल्कि वे उस सोच का प्रतीक हैं जिसमें जुनून, अनुशासन और समर्पण — तीनों मिलकर असंभव को संभव बनाते हैं।
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